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बजरंग बाण कब और क्यों और किसे करना चाहिए?

बजरंग बाण कब और क्यों और किसे करना चाहिए? जब मुश्किल में हों प्राण, बजरंग बाण का पाठ पूरी श्रद्धा से करें। जब आप भयंकर मुसीबत से घिरे हो परेशानियों से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा हो नौकरी में भयंकर मुश्किल हो, नौकरी छूट गई हो या छूटने वाली हो तंत्र मंत्र से किसी ने बाधा पहुंचाई हो संकट में कभी भी बजरंगबाण पढ़ सकते हैं , संकट से तुरंत मुक्ति दिलाता है बजरंगबाण अगर ऐसा है तो श्री हनुमान जी का सबसे शक्तिशाली बजरंग बाण आपकी सहायता कर सकता है। कहा जाता है कि जहां बजरंग बाण का पाठ किया जाता है, वहां हनुमान जी स्वयं आ जाते हैं। बजरंग बाण क्यों है अचूक ? पवनपुत्र श्री हनुमान जी श्रीराम के भक्त हैं। आप श्रीराम का नाम लें और हनुमान जी आपकी मदद के लिए न आएं ऐसा हो ही नहीं सकता नहीं सकता, क्योंकि बजरंग बाण में हनुमान जी के आराध्य प्रभु श्रीराम की सौगंध दिलाई गई है। इसलिए जब आप श्रीराम के नाम की सौगंध उठाएंगे तो हनुमान जी आपकी रक्षा करने जरुर आएंगे। बजरंग बाण में श्रीराम की सौगंध इन पंक्तियों में दिलाई गई है- भूत प्रेत पिशाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर, इन्हें मारु, तोहिं ...

ऐसे 6 प्रकार के लोग जिन्हें शत्रु समझना चाहिए और उनका त्याग कर देना चाहिए!

जय श्री कृष्णा बंधुओं स्वागत है एक बार अध्यात्म गुरु यूट्यूब चैनल में सज्जनोआज मैं आपको इस वीडियो के माध्यम से बहुत अच्छा संदेश देने जा रहा हूं आपसे निवेदन है बने रहिये इस वीडियो के समाप्त होने तक और अगर चैनल पर नए हैं तो सब्सक्राइब कर के घंटी के निशान को दबाएं आल नोटिफिकेशन ऑन कर दें।
सज्जनो आज का विषय है कि ऐसे 6 प्रकार के लोग जिन्हें शत्रु समझना चाहिए और उनका त्याग कर देना चाहिए वें लोग कसूं हैं आइये इस कहानी के माध्यम से आपको बताते हैं।
बंधुओं एक बार जंगल सभी चुनावी पशुओं की सभा लगी, उनमे इस बात की मन्त्रणा हो रही थी कि हम सभी जंगली जानवरों का राजा कौन होना चाहिए कुछ पशु कहने लगे कि भाई अभी तक तो हम शेर को अपना राजा बनाते चले आये हैं।



लेकिन शेर के पास कुछ जीव अपनी परेशानी बताने से डरते हैं। क्यों न हमारा राजा ऐसा हो जिसके पास कमजोर से कमजोर पशु अपनी शिकायत कर सके वो भी बिना किसी भय के इस प्रकार सभी पशुओं ने मन्त्रणा करने के बाद बंदर को अपना राजा बनाने की घोषणा की। अगर बंदर राजा बन जायेगा तो उसके अपनी समस्या कह सकेंगे इस प्रकार सबने एक बंदर को प्रत्याशी बनाकर शेर के विरोध में खड़ा कर दिया। जब मतदान शुरू हुआ तो सभी पशुओं ने बन्दर के पक्ष में अधिक से अधिक वोट डाले। जिसके कारण बंदर महाराज भारी मतों से विजयी हुए। जब यह खबर शेर ने सुनी कि इस सभी पशुओं ने सलाह कर के बंदर को मतदान कर दिया है। और अब नया राजा बन्दर बन गया है तो यह सुनकर शेर को बिल्कुल दुख नहीं हुआ और वो भी बन्दर को राजा बनने की बधाई देने चला आया शेर ने सोचा राजा तो कोई भी बन सकता है। जिसे चाहो उसे राजा बना दो परन्तु सरकार तो तब सफल मानी जाती है जब वह जनता की अच्छा नेतृत्व ले शाशन कायम रखे उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे बन्दर राजा तो बन गया क्या यह प्रजा की सुरक्षा कर पायेगा। यह तो समय ही बताएगा सज्जनों बड़ी धूम धाम बंदर का राज तिलक हुआ सभी वन्य जीव खुशी के मारे फूले नहीं समाये। धीरे धीरे समय गुजरता चला गया। एक दिन बन्दर महाराज के पास एक बकरी रोती चिल्लाती हुई आई और कहने लगी महाराज मेरे बच्चे को एक भेड़िया उठा ले गया है क्रिपया शीघ्र चलकर मेरे बच्चे की रक्षा कीजिये। बकरी दुख भरी प्रार्थना सुनकर बन्दर महाराज एक दम बकरी के साथ चलकर खड़े हुए उन्होंने तनिक भी बिलम्ब नहीं किया क्यों नए नए राजा बने थे इसलिए नए काम को तुरंत ही निपटाना चाहते थे। जिससे उन्हें जनता की वाहवाही लूटने को मिले अब बंदर महाराज वहां चले तो गए लेकिन वहाँ बकरी के बच्चे को बचाने के बाजय कभी वो इस पेड़ पर चढ़ जाते तो कभी उस पेड़ पर कभी पेड़ से कूदकर नीचे गिरते हैं  तो कभी उछल कूद करते हैं। उधर बकरी खड़ी खड़ी चिल्ला रही है। कि शीघ्र मेरे बच्चे को बचाओ पर बन्दर महाराज तो बन्दर महाराज थे। भेड़िये से सीधे जाकर लड़ नहीं सकते थे इसलिए वें आसपास ही उछल कूद करते रहे तब तक भेड़िये ने बकरी के बच्चे को खा लिया बकरी दहाड़े मारकर बन्दर से बोली तुम कैसे राजा जो तुमने मेरे बच्चे को बचाया तक नहीं मेरी आँखों के सामने भेड़िया मेरे बच्चे को खा गया। बन्दर कहने लगा सुनो है बकरी तुम्हारे बच्चे को बचाने के लिए मैंने क्या कम भाग दौड़ की थी। जब तुमने मुझे खबर दी तब मैं सब काम काज छोड़कर तुम्हारे साथ दौड़कर तुम्हारे साथ आ गया। मेरी मेहनत में क्या कमी रह गई मैने तो पूरी मेहनत की है न अब तुम्हारा बच्चा न बचा तो मेरा क्या दोष है। अगले दिन बन्दर महाराज के दरबार में सभी विशिष्ट जनो की सभा लगी सबने बन्दर से पूछा हे बन्दर महाराज आपने बकरी के बच्चे को बचाने के लिए क्या किया जो बकरी का बच्चा नहीं बच पाया सभासदों की बात सुनकर बन्दर ने कहा हे दरबारी जनो जैसे ही बकरी ने मुझे खबर दी कि उसके बच्चे को भेड़िया उठा ले गया है मैं तुरन्त सब काम छोड़कर बकरी के बच्चे को बचाने गया। मैं कभी इस पेड़ पर चढ़ा कभी उस पेड़ पर चढ़ा मैने इसके साथ अपनी भाग दौड़ में कोई कमी नहीं छोड़ी अब बताओ बकरी मुझपर दोषारोपण कर रही है। बन्दर की बात सुनकर सभी सभासद कहने लगे हे महाराज आपके उछल कूद करने से बकरी की जान तो नहीं बची। आपसे अच्छा तो शेर ही राजा होता कम से कम वो बकरी के बच्चे को बचाने के भेड़िये से लड़ जाता और बच्चे को बचा लेता। किसी ने सच कहा है राजा भी ऐसे व्यक्ति को बनाना चाहिए जो हर कार्य मे कुशल हो आवश्यकता पड़ने पर युद्ध भी लड़ सके किसी विद्वान ने सच कहा है कुमन्त्रियो से राजा कुवैदों से रोगी अधम राजा से प्रजा खोटी संतान से कुल कुबुद्धि से आत्मा सदैव नष्ट होते रहते है। 
इन पांच को शत्रु समझना चाहिए 
(1) मूर्ख पुत्र (2) रक्षा न करने वाला राजा या पिता 
(3) कुवैद    (4) क्रोधी (5) धनवान होकर भी न देने वाला 

और ऐसे 6 लोगों का त्याग करने में ही भलाई है।

https://youtu.be/YHduG4oqqdU


(1) उपदेश न देने वाला गुरु (2) मंत्रोच्चारण न करने वाला होता (3) रक्षा न करने वाला राजा (4) कटु वचन बोलने वाली भार्या (5) जिस धर्म में दया न हो वह धर्म (6) स्नेह रहित बान्धव इनका त्याग कर देने में ही भलाई है सज्जनों यदि यह वीडियो पसन्द आया हो तो वीडियो को लाइक कीजिए और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूलना आप लोगों का बहुत बहुत धन्यवाद जय श्रीकृष्ण जय श्री राम जय हिंद जय भारत।

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