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गार्गी याज्ञवल्क्य संवाद

दोस्तों, जरा अपनी आँखें बंद कीजिए और उस अनंत अंधेरे के बारे में सोचिए जो तारों के पार है। हम कौन हैं? हमें किसने बनाया है? और जिसने हमें बनाया है, उस परम सत्ता का उद्गम कहाँ से हुआ? क्या हमें बनाने वाला इसी ब्रह्मांड के किसी कोने में बैठा है, या वह इस ब्रह्मांड से परे, किसी 'मल्टीवर्स' यानी समानांतर ब्रह्मांड का हिस्सा है? आधुनिक विज्ञान आज 'स्ट्रिंग थ्योरी', 'क्वांटम मैकेनिक्स' और 'टाइम-ट्रैवल' के जरिए जिन डायमेंशन्स की बात कर रहा है, क्या यह संभव है कि हमारे सनातन ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व ही अपने ध्यान की असीम गहराइयों में उन 'क्वांटम पोर्टल्स' को खोज लिया था? ब्रह्मलोक कहाँ है? क्या वह कोई भौतिक स्थान है जहाँ जाया जा सकता है, या वह स्पेस और टाइम से परे एक शुद्ध ऊर्जा का ऐसा केंद्र है जिसे केवल महसूस किया जा सकता है? ऐसे हजारों सवाल हर उस इंसान को घेरे रहते हैं जो इस जीवन से कुछ ज्यादा समझना चाहता है। पर आज भी हमारे सबसे आधुनिक विज्ञान के पास इनके पूरी तरह से सटीक उत्तर नहीं हैं। इन्हीं गूढ़ और ब्रह्मांडीय प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए, भारत...

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