अश्वत्थामा जिंदा है
क्या आप यह कल्पना कर सकते हैं कि कुरुक्षेत्र के उस महाविनाश का एक प्रत्यक्षदर्शी आज भी हमारे बीच मौजूद है? एक ऐसा अजेय योद्धा, जो पिछले ५००० वर्षों से मृत्यु की प्रतीक्षा में युगों को बदलते देख रहा है। जिसके शरीर से आज भी मवाद और रक्त बहता है, जो अपने असहनीय घावों को शांत करने के लिए राहगीरों से तेल और हल्दी मांगता है। वह मृत्यु की भीख मांगता है, लेकिन स्वयं मृत्यु भी उससे दूर भागती है। आधुनिक विज्ञान इसे असंभव कह सकता है, लेकिन हमारे धर्मग्रंथ, युगों से चली आ रही लोककथाएं और उस पीड़ा का अहसास कुछ और ही गवाही देते हैं। यह कहानी है गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र, शिव के अंश और महाभारत के सबसे श्रापित योद्धा—अश्वत्थामा की। यह केवल एक श्राप की कहानी नहीं है, बल्कि कलयुग के अंत में भगवान कल्कि के साथ होने वाले अंतिम धर्मयुद्ध और मोक्ष की एक अद्भुत गाथा है। एक दरिद्र बचपन से अजेय योद्धा बनने तक इस महाविनाश की नींव कुरुक्षेत्र में नहीं, बल्कि गुरु द्रोणाचार्य की एक टूटी हुई कुटिया में पड़ी थी। एक समय था जब महान धनुर्धर द्रोणाचार्य अत्यंत निर्धन थे। निर्धनता ऐसी कि उनके पास अपने बालक अश्वत्थामा को ...