भगवान विष्णु को मिला 10 जन्मों का श्राप
ज़रा सोचिए उस अकल्पनीय पल के बारे में, जब साक्षात ब्रह्मांड के पालनहार श्रीहरि विष्णु को भी अपने ही कर्मों का परिणाम सहना पड़ा। एक ऐसा समय जब एक क्रुद्ध ऋषि के भीषण श्राप ने दशावतार की पूरी रूपरेखा ही बदल कर रख दी। और वह दिन, जब भगवान विष्णु की छाती पर किया गया एक प्रहार इस ब्रह्मांड के सबसे बड़े प्रश्न का उत्तर बन गया: 'त्रिदेवों में सर्वश्रेष्ठ कौन है?' आज की इस अद्भुत कथा के प्रमाण हमें भागवत पुराण के दशम स्कंध के 89वें अध्याय में प्राप्त होते हैं। जहाँ महर्षि भृगु त्रिदेवों की परीक्षा लेने निकलते हैं और वैकुंठ पहुँचकर भगवान नारायण के वक्षस्थल पर लात मारते हैं। वहीं दूसरी ओर, पद्म पुराण सहित अन्य ग्रंथ हमें एक अलग ही घटनाक्रम की ओर ले जाते हैं— हिमालय की वादियों में स्थित महर्षि भृगु के आश्रम की ओर। जहाँ अपनी पत्नी काव्यमाता के वध से क्रोधित होकर भृगु मुनि विष्णु जी को पृथ्वी पर बार-बार जन्म लेने और मृत्युलोक के कष्ट सहने का श्राप दे देते हैं। आज हम इन दोनों पौराणिक धाराओं को जोड़कर एक ऐसी सिनेमैटिक कथा बुनेंगे, जिसे आप केवल सुनेंगे नहीं, बल्कि अपनी बंद आँखों से देखेंगे, महसूस क...