जब श्रीराम हनुमान जी भेजा अनंत ब्रह्माण्ड
नमस्कार दोस्तों, मैं हूँ आपका दोस्त धर्मेन्द्र। आज हम इतिहास, विज्ञान और पुराणों की जिस गहरायी में उतरने वाले हैं, वह सफर आपके सोचने-समझने की पूरी बुनियाद को हिला कर रख देगा। आज की हमारी यह महा-डॉक्यूमेंट्री कोई आम किस्सा नहीं है, बल्कि यह समय, टाइम ट्रेवल, समानांतर ब्रह्मांड (Parallel Universe) और उस परम सत्य की कहानी है, जिसे समझने में आज के आधुनिक विज्ञान के भी पसीने छूट रहे हैं। अक्सर जब भी रामायण की बात होती है, तो कई विद्वान और दर्शक एक सवाल उठाते हैं कि वाल्मीकि रामायण में तो यह स्पष्ट लिखा है कि जब भगवान श्रीराम ने अपनी पृथ्वी की लीला समाप्त की और वे सरयू नदी में प्रवेश करके वापस वैकुंठ लोक गए, तब वहां हनुमान जी साक्षात उपस्थित थे। तो फिर यह अंगूठी वाली कहानी कहां से आ गई? दोस्तों, यहीं पर हमारे शास्त्रों का सबसे गूढ़ और जटिल विज्ञान—यानी 'कल्प भेद' (Difference of Aeons) और 'मल्टीवर्स' का सिद्धांत सामने आता है। सनातन धर्म के अनुसार समय एक सीधी रेखा नहीं है, बल्कि एक अनंत चक्र है। ब्रह्मांड के एक जीवन चक्र को एक 'कल्प' कहा जाता है। आज जो कहानी मैं आपको बत...