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अर्जुन का पाताल लोक रहस्यमई यात्रा

बचपन से लेकर आज तक, जब भी 'पाताल लोक' का नाम आता है, तो हमारे दिमाग में क्या छवि बनती है? एक भयंकर, खौफनाक और अंधकार से भरी हुई जगह। एक ऐसा नर्क जहां खौलते हुए तेल के विशाल कढ़ाहे हैं, जहां पापी आत्माओं को रोंगटे खड़े कर देने वाली यातनाएं दी जाती हैं, जहां भयानक सींगों वाले राक्षस हैं और जहां सिर्फ दर्दनाक चीखें गूंजती हैं। सदियों से हमारे जहन में यह डर बिठाया गया है। लेकिन मेरे दोस्तों, अगर मैं आपसे कहूं कि यह अब तक का बोला गया सबसे बड़ा झूठ है? अगर मैं पूरे दावे के साथ कहूं कि हमारे ही वेदों, पुराणों और प्राचीन ग्रंथों में जिस पाताल लोक का वास्तविक और गूढ़ वर्णन किया गया है, वह कोई नर्क नहीं बल्कि आज की हमारी 21वीं सदी की आधुनिक और एडवांस दुनिया से भी लाखों-करोड़ों गुना अधिक विकसित, चमत्कारी और सुंदर आयाम है? कल्पना कीजिए एक ऐसे अंडरग्राउंड ब्रह्मांड की जहां सूर्य की तपिश या चंद्रमा की चांदनी की कोई आवश्यकता ही नहीं है। क्योंकि वहां की गगनचुंबी इमारतें, वहां के रहस्यमयी रास्ते और वहां के निवासियों के मुकुटों में जड़ी अलौकिक मणियों का प्रकाश चौबीसों घंटे उस पूरी दुनिया को जगमग...

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