मां भूतेश्वरी
मां अन्नपूर्णा का एक ऐसा गोपनीय और प्रलयंकारी स्वरूप, जिसकी मात्र एक उन्मादी अट्टहास से समूचा ब्रह्मांड विनाश के मुहाने पर आ खड़ा हुआ था। यह रौद्र रूप था पंचमहाभूतों को अपने अधीन रखने वाली—देवी भूतेश्वरी का। कल्पना कीजिए उस दृश्य की, जहां साक्षात देवी महादेव की हथेली पर विराजमान होकर धधक रही हैं। शिव का कर-कमल भस्म हो रहा है, किंतु देवी के मुख पर लेशमात्र भी पीड़ा नहीं, बल्कि एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खौफनाक मुस्कान तैर रही है। जगत जननी आदिशक्ति का वह परम उग्र अंश, जिसका आह्वान केवल दैत्यों के समूल नाश के लिए किया गया था। परंतु जब यह शक्ति अपनी सीमाएं लांघ गई, तो स्वयं त्रिदेवों के लिए भी इसे नियंत्रित करना असंभव हो गया। शिव महापुराण के गूढ़ रहस्यों और काशी की लुप्त होती मौखिक परंपराओं में छिपी यह वह कथा है, जिसे सुनकर आज भी रूह कांप उठती है। वह ऐसा कालखंड था जब असुरों के पाशविक अत्याचारों से पृथ्वी त्राहि-त्राहि कर रही थी। अविनाशी नगरी काशी, जहां मृत्यु को भी प्रवेश की अनुमति नहीं, वहां भी एक ऐसी काली और भयावह रात उतरी, जब साक्षात काल के पहिए भी थम गए। दैत्यों का दुस्साहस अपने चरम प...