क्या हनुमान जी बंदर थे
कल्पना कीजिए त्रेता युग के उस समय की, जब पृथ्वी पर धर्म और अधर्म के बीच सबसे बड़ा महासंग्राम लड़ा जा रहा था। एक तरफ लंकापति रावण की विशाल, मायावी और अजेय राक्षसी सेना थी, और दूसरी तरफ... दूसरी तरफ वन में रहने वाले, पेड़ों की डालियों पर झूलने वाले 'वानर'। जब हम आँखें बंद करते हैं, तो हमें क्या दिखाई देता है? लंबी पूंछ, शरीर पर घने बाल, उछल-कूद करते हुए कुछ बंदर? लेकिन ठहरिए... यहीं पर एक बहुत बड़ा प्रश्न हमारे सामने आकर खड़ा हो जाता है। क्या सच में हनुमान जी, सुग्रीव, अंगद और बाली... क्या ये सभी केवल सामान्य बंदर थे? यदि हाँ, तो एक सामान्य पशु में पर्वतों को उखाड़ फेंकने का बल कहाँ से आया? एक पशु, जो जंगलों में रहता है, वह इंसानों की तरह इतनी स्पष्ट, कूटनीतिक और ज्ञानवर्धक बातें कैसे कर सकता था? और सबसे बड़ा रहस्य— एक पशु वेदों, उपनिषदों और व्याकरण का इतना बड़ा प्रकांड विद्वान कैसे हो सकता है? मेरे प्यारे दोस्तों, मैं आपका दोस्त, धर्मेंद्र, आज आपको एक ऐसी वैचारिक और ऐतिहासिक यात्रा पर ले जाने वाला हूँ, जो आपके सोचने के नजरिए को हमेशा के लिए बदल देगी। आप सुन रहे हैं 'अध्यात्म गुरु की...