लोना चमारी
यह कहानी ग्यारहवीं शताब्दी की है। पंजाब का एक सुदूर गांव सर्दियों की घनी धुंध में पूरी तरह से लिपटा हुआ था। हड्डियां कंपा देने वाली उस सर्द सुबह के करीब 5 बजने वाले थे, लेकिन कोहरे की मोटी चादर और घने अंधेरे ने हर तरफ अपना कब्जा जमा रखा था। ऐसे वीरान माहौल में, उस गांव के रसूखदार '11 ठाकुरों' के खानदान का एक नौजवान अपने कमरे में खटिया पर गहरी नींद सो रहा था। तभी अचानक उसे महसूस हुआ कि बंद कमरे में कोई और भी मौजूद है। शुरुआत में उसे लगा कि यह उसका कोई भ्रम है, लेकिन जब यह अहसास यकीन में बदल गया कि वहां सच में कोई है, तो उसने घबराकर रजाई से अपना सिर बाहर निकाला। सामने का नजारा देखते ही खौफ के मारे उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। उसके ठीक सामने वही लड़की खड़ी थी, जिसके साथ उसने और उसके परिवार वालों ने कुछ अरसा पहले एक घिनौना कुकृत्य किया था। वह लड़की रहस्यमयी ढंग से मुस्कुरा रही थी, उसका पूरा शरीर गहनों से लदा हुआ था और वह साक्षात सुंदरता की मूरत लग रही थी। मगर उसकी उस खूबसूरती में कुछ ऐसा खौफनाक था जिसने लड़के के भीतर सिहरन दौड़ा दी। दहशत की एक ठंडी लहर उसकी रीढ़ की हड्डी से नीचे उ...