मल्टीवर्स युद्ध : अंतिम विष्णु
बहुत पहले… इतना पहले कि जब समय ने चलना भी शुरू नहीं किया था… तब केवल शून्य था। ना प्रकाश… ना अंधकार… ना देवता… ना मृत्यु। लेकिन उसी शून्य में पहली बार एक कंपन हुआ और उससे जन्मा “काल”। काल ने समय को जन्म दिया… समय ने ब्रह्मांडों को… और ब्रह्मांडों ने जीवन को। पर सृष्टि के आरंभ के साथ ही एक और चीज पैदा हुई थी। वह कोई देवता नहीं थी। कोई राक्षस नहीं। वह एक त्रुटि थी… सृष्टि की पहली गलती। उसे नाम दिया गया—“नेक्स।” नेक्स समय को खाता था। वह ब्रह्मांडों को नष्ट नहीं करता था… वह उन्हें इतिहास से मिटा देता था। अगर कोई ब्रह्मांड उसके प्रभाव में आ जाए, तो ऐसा लगता जैसे वह कभी अस्तित्व में था ही नहीं। करोड़ों वर्षों तक महाविष्णु ने उसे “काल-बंधन” नाम की एक दिव्य कैद में बंद रखा। लेकिन हर कैद की एक सीमा होती है। और एक दिन… वह टूट गई।
अध्याय 2 — अंतिम भविष्य
वर्ष 9091। पृथ्वी अब पृथ्वी जैसी नहीं रह गई थी। आसमान में सूरज नहीं था। उसकी जगह एक कृत्रिम ऊर्जा तारा जल रहा था जिसे इंसानों ने बनाया था। शहर हवा में तैरते थे। इंसान अब मशीनों के साथ जीते थे। और समय यात्रा… अब विज्ञान बन चुकी थी। पृथ्वी की सबसे बड़ी संस्था “क्रोनोटेक” ने समय के द्वार खोल दिए थे। इंसान अब अतीत में जाकर इतिहास देख सकता था। भविष्य में जाकर सभ्यताओं का अध्ययन कर सकता था। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि हर टाइम ट्रैवल के साथ समय की दीवार कमजोर हो रही थी। उसी रात क्रोनोटेक के सबसे बड़े वैज्ञानिक डॉक्टर विराज अपने लैब में बैठे एक अजीब सिग्नल देख रहे थे। वह कोई साधारण रेडिएशन नहीं था। वह सिग्नल भविष्य से नहीं… बल्कि “समय के बाहर” से आ रहा था। अचानक पूरी लैब की लाइट बंद हो गई। स्क्रीन अपने आप चालू होने लगीं। हर स्क्रीन पर एक ही शब्द दिखाई दिया—“HE IS COMING.” तभी लैब की दीवार फट गई। लेकिन वहां कोई विस्फोट नहीं हुआ। बल्कि दीवार के पीछे एक अनंत अंधकार दिखाई दिया। और उस अंधकार के भीतर… हजारों टूटे हुए ब्रह्मांड तैर रहे थे।
अध्याय 3 — टाइम वॉर
डॉक्टर विराज को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। क्योंकि जो उन्होंने देखा था, वह केवल पृथ्वी के सुप्रीम काउंसिल को पता था। उन्हें पृथ्वी के नीचे बने एक गुप्त शहर में ले जाया गया। वहां दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग मौजूद थे। तभी उनके सामने एक विशाल होलोग्राम खुला। उसमें हजारों ब्रह्मांड दिखाई दिए। कुछ में पृथ्वी जल चुकी थी। कुछ में इंसान कभी पैदा ही नहीं हुए। कुछ में मशीनों ने देवताओं को खत्म कर दिया था। और कुछ में… समय रुक चुका था। “यह क्या है?” विराज ने पूछा। तभी एक बूढ़ा व्यक्ति आगे आया। सफेद वस्त्र… आंखों में अजीब चमक। “यह मल्टीवर्स है,” उसने कहा। “और यह मर रहा है।” “कौन हो तुम?” विराज बोले। बूढ़ा मुस्कुराया। “मुझे अलग-अलग युगों में अलग-अलग नामों से जाना गया। किसी ने मुझे नारद कहा… किसी ने यात्री… और किसी ने समय का साक्षी।” पूरा कमरा शांत हो गया। “हजारों साल पहले,” बूढ़ा बोला, “एक ऐसी शक्ति पैदा हुई थी जो समय को नियंत्रित नहीं… निगल सकती थी। उसने भविष्य के हजारों ब्रह्मांड समाप्त कर दिए। लेकिन उसे रोक दिया गया।” “किसने?” विराज ने पूछा। बूढ़े की आंखें गंभीर हो गईं। “विष्णु ने।” “लेकिन अब…” उसने होलोग्राम की ओर इशारा किया। “वह शक्ति वापस आ चुकी है।”
अध्याय 4 — वह ब्रह्मांड जहां भगवान कभी आए ही नहीं
नारद ने एक ब्रह्मांड दिखाया। वह बाकी सभी ब्रह्मांडों से अलग था। वहां कभी कोई अवतार नहीं आया। ना राम। ना कृष्ण। ना बुद्ध। वहां इंसानों ने खुद अपनी सभ्यता बनाई। लेकिन बिना धर्म के… बिना संतुलन के… वह सभ्यता राक्षस बन चुकी थी। पूरी पृथ्वी पर एक ही साम्राज्य का राज था—“ओब्लिवियन ऑर्डर।” उनका नेता कौन था, यह किसी ने नहीं देखा था। लेकिन कहते थे कि वह समय को नियंत्रित कर सकता है। तभी विराज की आंखें फैल गईं। क्योंकि उस स्क्रीन पर उन्होंने खुद को देखा। लेकिन वह भविष्य का विराज नहीं था। वह बूढ़ा था… और उसकी आंखें पूरी तरह काली थीं। “यह क्या है?” विराज कांप उठे। नारद बोले—“यह तुम हो।” “नहीं… यह असंभव है।” “हर टाइम ट्रैवल इंसान को बदलता है,” नारद बोले। “कुछ लोग समय को देखते हैं… और कुछ समय का हिस्सा बन जाते हैं।” तभी अचानक पूरा बेस हिल गया। अलार्म बजने लगे। एक सैनिक चिल्लाया—“सर! टाइम बैरियर टूट रहा है!” अगले ही पल दीवारों पर दरारें पड़ने लगीं। लेकिन वह पत्थर की दरारें नहीं थीं। वे समय की दरारें थीं। उनके भीतर अलग-अलग युग दिखाई दे रहे थे। डायनासोर। महाभारत। भविष्य के युद्ध। टूटते हुए तारे। और फिर… उन दरारों से कुछ बाहर आने लगा।
अध्याय 5 — समय शिकारी
वे इंसान नहीं थे। उनके शरीर धुएं जैसे थे। आंखें लाल थीं। और उनके हाथों में ऐसे अस्त्र थे जो किसी भी चीज को छूते ही उसे इतिहास से मिटा देते थे। “टाइम रीपर्स…” नारद फुसफुसाए। “नेक्स के सैनिक।” पूरी बेस में युद्ध शुरू हो गया। गोलियां उन पर असर नहीं कर रही थीं। क्योंकि वे पूरी तरह इस समय के नहीं थे। तभी एक रीपर ने एक सैनिक को छुआ… और वह सैनिक गायब हो गया। केवल मरा नहीं। उसका अस्तित्व मिट गया। उसकी यादें तक खत्म हो गईं। उसके परिवार की तस्वीरों से उसका चेहरा गायब हो गया। रिकॉर्ड्स से उसका नाम मिट गया। जैसे वह कभी पैदा ही नहीं हुआ था। विराज डर गए। “इन्हें रोकेगा कौन?” तभी अचानक पूरी बेस में नीली रोशनी फैल गई। समय रुक गया। रीपर्स स्थिर हो गए। और धीरे-धीरे अंधेरे से कोई बाहर आया। लंबा काला कवच। आंखों में नीली चमक। हाथ में एक जलती हुई तलवार। उसके आसपास समय मुड़ रहा था। “इतनी जल्दी हार मान ली?” उसने कहा। नारद मुस्कुराए। “तुम हमेशा लेट आते हो।” वह व्यक्ति हंसा। “अगर मैं समय से पहले आ जाऊं… तो टाइम ट्रैवल का मजा क्या?” विराज स्तब्ध थे। “तुम कौन हो?” वह व्यक्ति उनकी ओर मुड़ा। “मैं?” उसकी आंखें चमकीं। “मैं वह हूं… जिसे हर ब्रह्मांड अलग नाम से जानता है।” “कहीं मुझे कल्कि कहा गया…” “कहीं अंतिम यात्री…” “और कहीं…” उसने तलवार उठाई। “समय का अंत।”
अध्याय 6 — मल्टीवर्स का रहस्य
युद्ध खत्म होने के बाद वह रहस्यमयी योद्धा विराज को लेकर एक टाइम गेट के भीतर चला गया। अगले ही पल वे एक ऐसे स्थान पर पहुंचे जहां कोई जमीन नहीं थी। वहां अनंत दरवाजे तैर रहे थे। हर दरवाजा एक ब्रह्मांड था। “यह क्या जगह है?” विराज ने पूछा। “द नेक्सस,” योद्धा बोला। “सभी ब्रह्मांडों का केंद्र।” तभी विराज ने देखा कि कई दरवाजे टूट चुके थे। उनके भीतर केवल अंधकार था। “ये सब… खत्म हो चुके?” “हां,” योद्धा बोला। “नेक्स उन्हें खा चुका है।” “लेकिन वह चाहता क्या है?” योद्धा कुछ क्षण चुप रहा। फिर बोला—“मुक्ति।” “समय उसके लिए कैद है। जब तक समय रहेगा… जन्म और मृत्यु रहेंगे। और जब तक जन्म और मृत्यु रहेंगे… सृष्टि चलती रहेगी। वह सब खत्म करना चाहता है।” “तो उसे रोको!” विराज चिल्लाए। योद्धा धीरे से मुस्कुराया। “काश इतना आसान होता।” तभी अचानक पूरे नेक्सस में कंपन हुआ। सारे दरवाजे कांपने लगे। और दूर अंधकार में दो विशाल आंखें खुलीं। उन्हें देखकर पहली बार वह योद्धा भी गंभीर हो गया। “वह हमें ढूंढ चुका है…” अगले ही पल पूरा नेक्सस टूटने लगा। और समय का सबसे बड़ा युद्ध शुरू हो गया।
अध्याय 7 — द नेक्सस का पतन
पूरा नेक्सस कांप रहा था। अनंत दरवाजों से बने उस आयाम में पहली बार दरारें पड़ रही थीं। हर दरवाजा एक ब्रह्मांड था… और उन दरारों के भीतर से लाखों चीखें सुनाई दे रही थीं। विराज ने देखा कि दूर अंधकार में दो विशाल आंखें खुल चुकी थीं। वे आंखें किसी जीव की नहीं थीं। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शून्य उन्हें घूर रहा हो। तभी वह रहस्यमयी योद्धा अपनी तलवार कसकर पकड़ता है। उसके आसपास नीली ऊर्जा घूमने लगती है। “वह यहां कैसे पहुंच गया?” विराज कांपती आवाज में बोले। योद्धा धीरे से बोला—“क्योंकि अब समय की दीवारें टूट चुकी हैं। नेक्स अब किसी भी ब्रह्मांड में प्रवेश कर सकता है।” अचानक एक विशाल झटका लगा। नेक्सस के हजारों दरवाजे एक साथ फट गए। उन टूटे हुए दरवाजों से “टाइम रीपर्स” निकलने लगे। करोड़ों की संख्या में। वे हवा में नहीं चल रहे थे। वे समय के ऊपर चल रहे थे। जहां उनके कदम पड़ते, वहां समय बूढ़ा हो जाता। लोहे की दीवारें जंग खाकर टूटने लगीं। ऊर्जा ढालें राख में बदल गईं। विराज पीछे हट गए। “इतनों से लड़ना असंभव है!” योद्धा मुस्कुराया। “किसने कहा हम अकेले हैं?” तभी अचानक पूरे नेक्सस में शंखनाद गूंज उठा। और अगले ही पल अलग-अलग दरवाजों से योद्धा निकलने लगे। किसी के हाथ में लेजर भाला था। कोई प्राचीन कवच पहने था। कोई मशीन जैसा दिख रहा था। विराज स्तब्ध रह गए। “ये… कौन हैं?” नारद की आवाज गूंजी—“ये वे हैं जिन्हें अलग-अलग ब्रह्मांडों में अलग-अलग नाम मिले।” “कहीं इन्हें अवतार कहा गया…” “कहीं संरक्षक…” “और कहीं…” “टाइम वॉकर।”
अध्याय 8 — वह योद्धा जो हर युग में जीवित था
युद्ध शुरू हो चुका था। पूरा नेक्सस जल रहा था। एक तरफ टाइम रीपर्स की अनंत सेना थी। दूसरी तरफ वे योद्धा जो अलग-अलग समय रेखाओं से आए थे। तभी विराज ने देखा कि उनके साथ खड़ा रहस्यमयी योद्धा अचानक हवा में गायब हो गया। अगले ही पल वह हजारों मीटर दूर दिखाई दिया। उसकी तलवार जैसे समय को काट रही थी। जहां वह वार करता, वहां रीपर्स रुक जाते और फिर धूल बनकर बिखर जाते। लेकिन तभी विराज ने कुछ अजीब देखा। हर बार जब वह योद्धा अपनी शक्ति इस्तेमाल करता… उसका शरीर थोड़ा और कमजोर हो जाता। “यह क्या हो रहा है?” विराज ने पूछा। नारद गंभीर हो गए। “वह इस समय का नहीं है।” “मतलब?” “वह हजारों टाइमलाइन में जीवित रह चुका है। उसका अस्तित्व अब स्थिर नहीं रहा। जितनी बार वह समय को मोड़ता है… उतना ही वह खुद मिटने लगता है।” तभी अचानक युद्ध रुक गया। पूरा नेक्सस अंधेरे में डूब गया। और फिर… वह आया। नेक्स। पहली बार उसका वास्तविक रूप दिखाई दिया। वह इतना विशाल था कि उसके पीछे पूरे ब्रह्मांड छोटे लग रहे थे। उसका शरीर बदलता रहता था। कभी वह मानव जैसा दिखता… कभी दैत्य जैसा… और कभी केवल अंधकार का समुद्र। उसकी आवाज गूंजी—“तुम अभी भी लड़ रहे हो?” “मैंने हजारों ब्रह्मांड खत्म कर दिए…” “हजारों विष्णुओं को मिटा दिया…” “फिर भी तुम्हें उम्मीद है?” रहस्यमयी योद्धा मुस्कुराया। “तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी पता है क्या है?” नेक्स शांत हो गया। “तुम समय को समझते हो…” “लेकिन जीवन को नहीं।”
अध्याय 9 — समय के पार छिपा हुआ रहस्य
नेक्स हंसा। उसकी हंसी से पूरा नेक्सस टूटने लगा। “जीवन?” उसने कहा। “जीवन केवल एक गलती है।” “जन्म… मृत्यु… दुख… युद्ध…” “मैं बस इसे समाप्त करना चाहता हूं।” तभी अचानक योद्धा ने अपनी तलवार जमीन में घोंप दी। पूरा नेक्सस नीली रोशनी से भर गया। और विराज के सामने हजारों दृश्य चमकने लगे। अलग-अलग ब्रह्मांड। अलग-अलग पृथ्वियां। कहीं इंसान पत्थरों के युग में थे। कहीं वे तारों के बीच साम्राज्य चला रहे थे। कहीं देवता मशीनों के साथ युद्ध कर रहे थे। और हर दृश्य में एक चीज समान थी—उम्मीद। “देख रहे हो?” योद्धा बोला। “यही वह चीज है जिसे तुम कभी नहीं समझ सके।” “हर बार जब कोई ब्रह्मांड टूटता है… जीवन फिर पैदा हो जाता है।” “हर अंत के बाद एक नई शुरुआत होती है।” नेक्स की आंखें लाल हो गईं। “इसलिए मैं शुरुआत को ही खत्म कर दूंगा।” अचानक उसके शरीर से काली ऊर्जा निकली और उसने पूरे नेक्सस को जकड़ लिया। सारे दरवाजे बंद होने लगे। “वह क्या कर रहा है?” विराज चिल्लाए। नारद के चेहरे का रंग उड़ गया। “वह मूल समयरेखा तक पहुंचना चाहता है!” “अगर वह वहां पहुंच गया… तो वह सृष्टि के आरंभ को मिटा देगा।” “और तब…” “कोई ब्रह्मांड कभी जन्म ही नहीं लेगा।”
अध्याय 10 — आदि बिंदु
तभी अचानक पूरा नेक्सस गायब हो गया। विराज ने महसूस किया कि वे किसी और जगह पहुंच चुके हैं। वहां कुछ नहीं था। ना तारे। ना ग्रह। ना प्रकाश। केवल एक चमकता हुआ बिंदु। “यह क्या जगह है?” विराज ने धीरे से पूछा। रहस्यमयी योद्धा पहली बार शांत दिखाई दिया। “यह आदि बिंदु है।” “यहीं से पहली बार समय शुरू हुआ था।” विराज स्तब्ध रह गए। “मतलब… यह सृष्टि की शुरुआत है?” “हां।” तभी सामने अंधकार फैलने लगा। नेक्स वहां पहुंच चुका था। उसकी आवाज गूंजी—“बस एक कदम और…” “और सब खत्म।” अचानक वह चमकता हुआ बिंदु कांपने लगा। समय अस्थिर होने लगा। विराज ने देखा कि उनके हाथ गायब होने लगे हैं। फिर वापस दिखाई देने लगे। “क्या हो रहा है?” “अगर आदि बिंदु नष्ट हुआ…” योद्धा बोला, “तो हम सब कभी अस्तित्व में आए ही नहीं होंगे।” तभी विराज ने पहली बार उस योद्धा की आंखों में डर देखा। लेकिन अगले ही पल वह मुस्कुराया। “शायद यही अंत है।” “नहीं!” विराज चिल्लाए। “कोई रास्ता होगा!” योद्धा कुछ क्षण शांत रहा। फिर धीरे से बोला—“एक है…” “लेकिन उसके बाद मैं नहीं बचूंगा।” उसने अपनी तलवार उठाई। और पहली बार विराज ने उस तलवार पर लिखा हुआ देखा—“सुदर्शन।” उनकी आंखें फैल गईं। “तुम… कौन हो?” योद्धा मुस्कुराया। “मैं वह हूं… जिसे हर युग में अलग रूप लेना पड़ा।” “कभी राम…” “कभी कृष्ण…” “कभी केवल एक यात्री…” “और अब…” उसकी आंखों में नीली अग्नि जल उठी। “समय का अंतिम रक्षक।” अगले ही पल उसने तलवार सीधा आदि बिंदु में घोंप दी… और पूरा अस्तित्व प्रकाश में डूब गया।
अध्याय 11 — जब समय रुक गया
जैसे ही सुदर्शन आदि बिंदु से टकराया… पूरा अस्तित्व थम गया। ना आवाज बची… ना प्रकाश… ना अंधकार। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने पूरे मल्टीवर्स की सांस रोक दी हो। विराज ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उनका शरीर टूटने लगा था। उनकी यादें बिखर रही थीं। उन्हें अपना बचपन याद आया… फिर वह गायब हो गया। उन्हें पृथ्वी याद आई… फिर वह भी धुंधली पड़ने लगी। क्योंकि जब सृष्टि का आरंभ डगमगाता है… तब हर याद, हर जीवन, हर इतिहास टूटने लगता है। लेकिन उसी शून्य के भीतर एक आवाज गूंजी—“अभी नहीं…” अचानक सुदर्शन से अनंत प्रकाश निकला। वह कोई साधारण प्रकाश नहीं था। उसमें करोड़ों युगों की स्मृतियां थीं। राम का वनवास… कृष्ण की गीता… भविष्य के युद्ध… टूटती हुई आकाशगंगाएं… सब कुछ उस प्रकाश में दिखाई देने लगा। नेक्स पहली बार पीछे हट गया। उसकी आंखों में भय था। “यह… असंभव है…” उसने कहा। “तुम अपनी शक्ति का स्रोत नष्ट कर रहे हो!” रहस्यमयी योद्धा मुस्कुराया। “नहीं…” “मैं उसे मुक्त कर रहा हूं।”
अध्याय 12 — विष्णु का रहस्य
तभी विराज ने कुछ ऐसा देखा जिसने उनके होश उड़ा दिए। वह योद्धा धीरे-धीरे बदलने लगा। उसके अलग-अलग रूप दिखाई देने लगे। कभी वह राम जैसा दिखता… कभी कृष्ण… कभी बुद्ध… कभी कल्कि… और फिर अचानक उन सबके पीछे एक विशाल दिव्य स्वरूप दिखाई दिया। चार भुजाएं। अनंत प्रकाश। और आंखों में पूरा ब्रह्मांड। विराज कांप उठे। “महाविष्णु…” नारद की आवाज गूंजी—“अब समझे?” “अवतार कभी अलग-अलग नहीं थे।” “वे हमेशा एक ही चेतना के टुकड़े थे।” “और यह…” उन्होंने उस योद्धा की ओर देखा। “यह उनका अंतिम स्वरूप है।” नेक्स क्रोधित हो उठा। “तो तुमने खुद को समय में छिपा लिया!” विष्णु मुस्कुराए। “क्योंकि तुम शक्ति को समझते थे… लेकिन त्याग को नहीं।” “हर बार जब तुमने एक अवतार को खत्म किया…” “मैंने खुद को हजारों समय रेखाओं में बांट दिया।” “तुम मुझे खोजते रहे…” “लेकिन मैं हर युग में जन्म लेता रहा।” नेक्स चीख उठा और पूरे शून्य में अंधकार फैल गया। “तो मैं इस बार सब कुछ खत्म कर दूंगा!”
अध्याय 13 — मल्टीवर्स वॉर
अचानक पूरा शून्य युद्धभूमि में बदल गया। नेक्स ने अपने हाथ फैलाए और अनगिनत टाइम रीपर्स पैदा हो गए। वे अब पहले से भी अधिक भयानक थे। उनके शरीर के भीतर टूटे हुए ब्रह्मांड घूम रहे थे। दूसरी तरफ विष्णु ने सुदर्शन उठाया। और तभी… मल्टीवर्स के हजारों दरवाजे खुल गए। हर दरवाजे से सेनाएं निकलने लगीं। कहीं भविष्य के साइबर योद्धा थे। कहीं प्राचीन ऋषि। कहीं उड़ती मशीनों पर बैठे सैनिक। कहीं दिव्य अस्त्र लिए देवता। विराज ने देखा कि एक दरवाजे से विशाल वानर सेना निकल रही थी। दूसरे से अंतरिक्ष युद्धपोत। तीसरे से ऐसे इंसान जिनकी आंखों में ऊर्जा जल रही थी। “ये सब कौन हैं?” विराज ने पूछा। नारद मुस्कुराए। “वे सभी… जिन्हें अलग-अलग युगों में धर्म ने चुना।” युद्ध शुरू हो गया। पूरा अस्तित्व कांपने लगा। ग्रह हथियारों की तरह इस्तेमाल हो रहे थे। टाइम पोर्टल फट रहे थे। कुछ योद्धा एक सेकंड में हजारों साल बूढ़े हो जाते… कुछ समय उल्टा करके वापस जीवित हो जाते। यह केवल युद्ध नहीं था। यह स्वयं समय का संघर्ष था।
अध्याय 14 — विश्वासघात
लेकिन तभी कुछ अप्रत्याशित हुआ। विराज के भीतर अचानक तेज दर्द उठा। उनके हाथों पर काली रेखाएं फैलने लगीं। नारद का चेहरा बदल गया। “नहीं…” विराज चिल्लाए—“क्या हो रहा है मुझे?” तभी नेक्स हंसा। “उसे सच बता दो।” विष्णु शांत हो गए। विराज की सांसें भारी थीं। “कौन सा सच?” नेक्स बोला—“तुम सोचते हो तुम सिर्फ एक वैज्ञानिक हो?” “नहीं…” “तुम मेरे द्वार हो।” पूरा युद्ध जैसे रुक गया। विराज स्तब्ध रह गए। “क्या?” नेक्स की आवाज गूंजी—“हर बार जब इंसानों ने टाइम ट्रैवल किया… उन्हें ऊर्जा चाहिए थी। वह ऊर्जा मैंने दी।” “धीरे-धीरे मैंने तुम्हारी सभ्यता के भीतर अपना अंश डाल दिया।” “और विराज…” उसकी आंखें चमकीं। “तुम पहले इंसान हो जिसने समय के बाहर झांका।” “इसीलिए तुम्हारे भीतर मेरा सबसे बड़ा अंश मौजूद है।” विराज पीछे हट गए। “नहीं… यह झूठ है…” लेकिन तभी उन्हें याद आने लगा। बचपन से वे जो आवाजें सुनते थे… जो सपने देखते थे… वह सब नेक्स ही था। विष्णु धीरे से बोले—“इसीलिए मैंने तुम्हें चुना।” “क्योंकि केवल वही व्यक्ति नेक्स को रोक सकता है… जिसके भीतर उसका अंश हो।”
अध्याय 15 — अंतिम निर्णय
पूरा युद्ध रुक चुका था। अब सबकी नजर विराज पर थी। नेक्स मुस्कुराया। “आओ…” “मेरे साथ मिल जाओ।” “हम दुख खत्म कर देंगे।” “ना युद्ध रहेगा… ना मृत्यु…” “ना समय…” विराज कांप रहे थे। उनके भीतर अंधकार बढ़ रहा था। उन्हें लग रहा था कि उनका शरीर दो हिस्सों में टूट रहा है। तभी विष्णु उनके पास आए। “डरो मत।” “हर युग में चुनाव ही सृष्टि तय करता है।” “राम ने भी चुनाव किया था।” “अर्जुन ने भी।” “अब तुम्हारी बारी है।” विराज की आंखों में आंसू आ गए। “अगर मैंने गलत चुना तो?” विष्णु मुस्कुराए। “तभी तो मनुष्य देवताओं से विशेष है।” “क्योंकि भविष्य पहले से तय नहीं होता।”
अध्याय 16 — अंत या आरंभ
नेक्स ने अपना हाथ बढ़ाया। पूरा शून्य कांपने लगा। “समय समाप्त हो रहा है!” नारद चिल्लाए। विराज ने आंखें बंद कर लीं। उनके भीतर दो आवाजें थीं। एक कह रही थी—सब खत्म कर दो। दूसरी कह रही थी—लड़ो। अचानक उन्हें पृथ्वी याद आई। इंसानों की गलतियां… उनकी उम्मीदें… उनका संघर्ष… और फिर उन्हें समझ आया। जीवन का अर्थ पूर्णता नहीं है। संघर्ष ही जीवन है। विराज ने आंखें खोलीं। और सीधे नेक्स की ओर बढ़ गए। “अगर तुम मेरे भीतर हो…” उन्होंने कहा, “तो तुम्हारा अंत भी यहीं होगा।” अगले ही पल उन्होंने खुद को नेक्स के भीतर झोंक दिया। पूरा अस्तित्व सफेद प्रकाश में डूब गया। एक विस्फोट हुआ जिसने समय की हर रेखा को हिला दिया। फिर… शांति। धीरे-धीरे प्रकाश खत्म हुआ। नेक्स गायब था। टाइम रीपर्स राख बन चुके थे। और आदि बिंदु फिर स्थिर हो चुका था। लेकिन विराज… अब वहां नहीं थे। नारद ने धीरे से पूछा—“क्या वह खत्म हो गया?” विष्णु शांत खड़े रहे। फिर उन्होंने मुस्कुराकर कहा—“ऊर्जा कभी समाप्त नहीं होती।” “वह केवल रूप बदलती है।”
अध्याय 17 — नया युग
हजारों साल बाद। एक नई पृथ्वी। हरे जंगल। साफ आसमान। इंसानों ने फिर सभ्यता बना ली थी। लेकिन इस बार उन्होंने समय से खेलने की कोशिश नहीं की। एक छोटा बच्चा रात में आसमान देख रहा था। तभी अचानक एक टूटता हुआ तारा दिखाई दिया। बच्चे ने आंखें बंद कर इच्छा मांगी। और उसी क्षण… दूर अंतरिक्ष में… किसी की आंखें खुलीं। नीली चमकती आंखें। फिर एक धीमी आवाज गूंजी—“टाइमलाइन स्थिर है…” “लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ…” और अंधेरे में फिर दो लाल आंखें चमक उठीं। क्योंकि हर अंत के बाद… एक नया अध्याय शुरू होता है।
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