किस आयाम में रहते हैं भगवान
क्या तुमने कभी यह सोचने की कोशिश की है कि दुनिया भर के महान वैज्ञानिक और क्वांटम फिजिसिस्ट हमेशा 'Dimensions' यानी 'आयामों' की ही बात क्यों करते रहते हैं? आखिर ये आयाम होते क्या हैं? आधुनिक विज्ञान, विशेषकर 'स्ट्रिंग थ्योरी' (String Theory) और 'एम-थ्योरी' (M-Theory) के अनुसार, इस ब्रह्मांड में कुल 11 आयाम मौजूद हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि जो सभ्यता जितने ऊंचे आयाम पर काबू पा लेती है, वह उतनी ही शक्तिशाली और ईश्वर के समान हो जाती है। लेकिन... क्या यह ज्ञान नया है? जी नहीं! आज से हजारों साल पहले, जब पश्चिमी दुनिया को ब्रह्मांड का 'ब' भी नहीं पता था, तब हमारे ऋषि-मुनियों ने वेदों और पुराणों में 14 लोकों, अनंत कोटि ब्रह्मांडों और समय के परे स्थित आयामों का पूरा विज्ञान लिख दिया था। आज हम विज्ञान और सनातन धर्म को एक तराजू पर रखेंगे और जानेंगे कि आखिर 11वें आयाम के उस पार, उस परम सत्य (God) का असली स्वरूप क्या है।" आइए शुरुआत करते हैं पहले तीन आयामों से—1D, 2D और 3D। विज्ञान की भाषा में बात करें तो पहला आयाम (1st Dimension) एक सीधी रेखा है, जिसमें केवल लंबाई होती है। दूसरा आयाम (2nd Dimension) एक सतह है, जिसमें लंबाई और चौड़ाई दोनों होती हैं—जैसे एक कागज का पन्ना। और तीसरा आयाम (3rd Dimension) वह है जिसमें हम और आप रहते हैं। इस तीसरे आयाम में लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई तीनों होती हैं। इसमें 'स्ट्रक्चरल फ्रीडम' होती है। सनातन धर्म के अनुसार, यह हमारा भौतिक जगत है, जिसे 'भूलॉक' या 'मृत्युलोक' कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, ब्रह्मांड की शुरुआत एक बिंदु (0 Dimension) से हुई थी, जिसे 'शिव' का निराकार स्वरूप या 'लिंग' कहा गया है। उसी बिंदु से इस त्रिआयामी (3D) दुनिया का विस्तार हुआ, जिसे 'माया' कहते हैं। हम इंसान तीसरे आयाम के कैदी हैं। हम इस 3D दुनिया की हर चीज़ छू सकते हैं, महसूस कर सकते हैं। लेकिन हमारी आँखें इसके पार का सच नहीं देख सकतीं। विज्ञान कहता है कि इस ब्रह्मांड में कई ऐसी सभ्यताएं हो सकती हैं जो हमसे कहीं अधिक आधुनिक हैं, जो उन आयामों में रहती हैं जिन्हें हम देख ही नहीं सकते। और हमारे वेद इन्हीं उच्च सभ्यताओं को 'देवता', 'यक्ष', और 'गंधर्व' कहते हैं, जो उच्च लोकों (Higher Dimensions) में निवास करते हैं।" "तीसरे आयाम के बाद आता है सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली चौथा आयाम—समय (Time)। अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी 'थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी' (Theory of Relativity) में दुनिया को बताया कि समय कोई सीधी रेखा नहीं है, यह बदल सकता है, मुड़ सकता है। समय चौथा आयाम है। जो सभ्यता चौथे आयाम को कंट्रोल कर लेगी, वह समय में आगे-पीछे देख सकेगी। लेकिन 4D के जीव समय को बदल नहीं सकते, केवल उसे महसूस कर सकते हैं। अब सुनिए सनातन धर्म का वह शोध, जो आइंस्टीन से हजारों साल पहले लिखा गया था। श्रीमद्भागवत पुराण के नौवें स्कंध में राजा ककुद्मी की कथा आती है। राजा ककुद्मी अपनी पुत्री रेवती के विवाह के लिए सुयोग्य वर पूछने, अपने 3D जगत से सीधे 4D या उससे भी उच्च आयाम 'ब्रह्मलोक' (Brahma Loka) में भगवान ब्रह्मा के पास गए।
जब वे वहां पहुंचे, तो ब्रह्मा जी गंधर्वों का संगीत सुन रहे थे। राजा ने कुछ पल प्रतीक्षा की। जब संगीत खत्म हुआ, तो राजा ने अपनी बात रखी। तब ब्रह्मा जी मुस्कुराए और बोले—'हे राजा! तुम जितनी देर यहां रुके, उतने समय में पृथ्वी पर 27 चतुर्युग (यानी लाखों साल) बीत चुके हैं। तुम्हारे समकालीन सगे-संबंधी, यहाँ तक कि उनके नाम लेने वाला भी पृथ्वी पर कोई नहीं बचा है।' दोस्त, इसे कहते हैं 'Time Dilation' (समय का फैलाव)। जो सिद्धांत आधुनिक विज्ञान ने आज खोजा है, वह हमारे पुराणों में राजा ककुद्मी और भगवान ब्रह्मा के संवाद में स्पष्ट रूप से लिखा है। सनातन धर्म में समय को 'काल' कहा गया है, जो महाकाल (भगवान शिव) के अधीन है। चौथे आयाम में रहने वाली सभ्यताएं भविष्य देख सकती हैं, लेकिन जो इन सभी आयामों से परे हैं, वही महाकाल हैं।" "ऐ दोस्त! क्या तुमने कभी सोचा है कि अगर तुमने उस दिन वो फैसला न लिया होता, तो तुम्हारी जिंदगी आज कैसी होती? क्वांटम फिजिक्स के अनुसार, हर वो फैसला जो तुमने नहीं लिया, वो किसी दूसरे ब्रह्मांड में सच हो रहा है। इसे ही कहते हैं पांचवां आयाम (5th Dimension)। वैज्ञानिक भाषा में, पांचवां आयाम हमें 'पैरेलल यूनिवर्स' यानी समानांतर ब्रह्मांडों को देखने की शक्ति देता है। यहाँ आप अपनी ही जिंदगी के अलग-अलग रूप देख सकते हैं। लेकिन छठा आयाम (6th Dimension) इससे भी ऊपर है—यहाँ आप उन अलग-अलग संभावनाओं के बीच 'टाइम ट्रेवल' कर सकते हैं, यानी अपनी किस्मत की रेखाओं को बदलते हुए एक दुनिया से दूसरी दुनिया में छलांग लगा सकते हैं। अब जरा सनातन धर्म के पन्नों को पलटिए। श्रीमद्भागवत पुराण में एक अत्यंत अद्भुत प्रसंग आता है—'ब्रह्मा विमोहन लीला'। जब भगवान ब्रह्मा को अपनी शक्ति पर अहंकार हुआ, तो श्रीकृष्ण ने उन्हें अपनी दिव्यता का दर्शन कराया। ब्रह्मा जी ने देखा कि उनके सामने केवल एक ही नहीं, बल्कि करोड़ों ब्रह्मा खड़े हैं! कोई 10 सिरों वाला, कोई 100 सिरों वाला और कोई हजारों सिरों वाला। हर ब्रह्मा अपने-अपने ब्रह्मांड (Universal Bubble) से आया था। यह 'मल्टीवर्स' (Multiverse) का सबसे सटीक वर्णन है जो हजारों साल पहले लिखा गया था। विज्ञान जिसे आज 'Many-Worlds Interpretation' कह रहा है, हमारे पुराणों ने उसे 'अनंत कोटि ब्रह्मांड' के नाम से सदियों पहले परिभाषित कर दिया था।" सातवें आयाम में पहुँचते ही हम उन सीमाओं को पार कर जाते हैं जो हमारे ब्रह्मांड के नियमों (Laws of Physics) से बंधी हैं। सातवां आयाम वह स्थान है जहाँ अलग-अलग 'बिग बैंग' (Big Bangs) हुए और अलग-अलग भौतिक नियमों वाले ब्रह्मांड जन्मे। और आठवां आयाम? यह उन सभी का मास्टर है, जहाँ आप किसी भी ब्रह्मांड के इतिहास और भविष्य को अपनी इच्छानुसार बदल सकते हैं। लेकिन दोस्त, विज्ञान यहाँ आकर रुक जाता है, पर हमारी सनातन खोज जारी रहती है। 'ब्रह्म संहिता' और 'श्रीमद्भागवत' के अनुसार, इन अनंत ब्रह्मांडों की जननी कोई और नहीं, बल्कि 'महाविष्णु' हैं। कल्पना कीजिए एक ऐसे विशाल पुरुष की, जिनका विस्तार शब्दों में समा नहीं सकता। वे 'कारण सागर' (Ocean of Causality) में योग निद्रा में लीन हैं। पुराण कहते हैं कि महाविष्णु के शरीर पर करोड़ों रोम छिद्र (Pores) हैं। उनके हर एक रोम-कूप (Pore) से एक पूरा का पूरा ब्रह्मांड एक सुनहरे अंडे (Hiranyagarbha) के रूप में बाहर निकलता है।
जब महाविष्णु सांस बाहर छोड़ते हैं (Exhalation), तो करोड़ों ब्रह्मांड पैदा होते हैं, और जब वे सांस अंदर लेते हैं (Inhalation), तो ये सभी ब्रह्मांड वापस उनमें विलीन हो जाते हैं। विज्ञान जिसे 'Cosmic Inflation' और 'Big Crunch' कहता है, वह वास्तव में परमात्मा की एक सांस मात्र है। आठवें आयाम की जो शक्ति विज्ञान कल्पना करता है, वह वास्तव में महाविष्णु की एक इच्छा मात्र है। यहाँ समय, स्थान और पदार्थ—सब कुछ उनके संकल्प से पैदा होता है और उनमें ही समाप्त हो जाता है।" अब अपने दिमाग के सभी दरवाजे खोल लो, क्योंकि हम नौवें और दसवें आयाम में प्रवेश कर रहे हैं। विज्ञान कहता है कि नौवें आयाम (9th Dimension) में पहुँचने वाली सभ्यता उन सभी ब्रह्मांडों के इतिहास, वर्तमान और भविष्य को न सिर्फ देख सकती है, बल्कि उनके भौतिक नियमों (Laws of Physics) की तुलना करके उनमें मनचाहा बदलाव कर सकती है। लेकिन यहाँ एक पेंच है! अगर आप 9D में कोई बदलाव करते हैं, तो उसका असर आपकी अपनी टाइमलाइन पर भी पड़ेगा। विज्ञान इसे 'Cause and Effect' कहता है। लेकिन सनातन धर्म इसे क्या कहता है? सनातन धर्म इसे कहता है 'कर्म का सिद्धांत' (Law of Karma)। तुम चाहे किसी भी ब्रह्मांड में चले जाओ, जब तक तुम सृष्टि के दायरे में हो, तुम्हें अपने कर्मों का फल भुगतना ही होगा। परंतु, जब हम दसवें आयाम (10th Dimension) में कदम रखते हैं, तो सब कुछ बदल जाता है। विज्ञान की नजर में 10D वह बिंदु है जहाँ हर संभव सत्य, हर संभव भविष्य और हर कल्पना का अंत हो जाता है। स्ट्रिंग थ्योरी के अनुसार, दसवें आयाम के जीव ही असली 'ईश्वर' या 'God' हैं। वे समय और स्थान के बंधन से पूरी तरह मुक्त हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं और उन पर किसी कर्म का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सनातन परंपरा में, यह दसवां आयाम 'सदाशिव' या 'निर्गुण ब्रह्म' की अवस्था है। यह वह सत्य है जिसका न कोई आदि है, न अंत। न कोई रूप है, न आकार। यहाँ कोई समय नहीं बीतता। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से यही कहा था—'मैं ही भूत, वर्तमान और भविष्य हूँ। मुझसे परे कुछ भी नहीं है।' दसवें आयाम की सत्ता मृत्यु और जन्म के चक्र से मुक्त है। यही वह अवस्था है जिसे प्राप्त करने के लिए हमारे ऋषि-मुनि युगों-युगों तक तपस्या करते थे, जिसे हम 'मोक्ष' कहते हैं।" "और अब, दोस्त... हम आ पहुँचे हैं उस अंतिम सीमा पर, जिसके आगे विज्ञान भी अंधा हो जाता है। 11वां आयाम (11th Dimension)। जब वैज्ञानिकों ने 'एम-थ्योरी' (M-Theory) दी, तो उन्हें समझ आया कि 10 आयाम भी इस अनंत ब्रह्मांड को समझाने के लिए काफी नहीं हैं। उन्हें 11वें आयाम की जरूरत पड़ी। विज्ञान कहता है कि 11वां आयाम एक 'मेम्ब्रेन' (Membrane) या एक सूक्ष्म झिल्ली की तरह है, जिसके कंपन (Vibration) से ही यह पूरा अस्तित्व पैदा हुआ है। यही वह 'सिंगुलैरिटी' (Singularity) है, जहाँ से बिग बैंग हुआ। यह रचयिता (The Creator) का अपना लोक है। इसके पार क्या है? यह कोई वैज्ञानिक नहीं जानता। लेकिन गर्व करो दोस्त, क्योंकि हजारों साल पहले उपनिषदों ने इस 11वें आयाम को बहुत ही स्पष्ट शब्दों में दुनिया के सामने रख दिया था। इसे सनातन धर्म में 'शब्द ब्रह्म' (Shabda Brahman) या 'नाद ब्रह्म' कहा गया है! विज्ञान जिसे 11वें आयाम का 'कंपन' या 'Vibration' कह रहा है, हमारे वेद उसे 'ॐ' (OM) की ध्वनि कहते हैं। मांडूक्य उपनिषद स्पष्ट कहता है कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड, यह भूत, वर्तमान और भविष्य—सब कुछ 'ॐ' के कंपन से ही उत्पन्न हुआ है। विज्ञान जिसे 'सिंगुलैरिटी' (Singularity) का एक बिंदु कहता है, सनातन धर्म उसे श्रीयंत्र का 'बिंदु' (Bindu) कहता है—वह बिंदु जिसमें शिव और शक्ति एक साथ एकाकार होकर संपूर्ण सृष्टि की रचना करते हैं। वह रचयिता कौन है? वह 11वें आयाम की सत्ता है, जो हमारे भीतर भी है और इस अनंत ब्रह्मांड के बाहर भी। ईशावास्योपनिषद कहता है। 'पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥' (वह भी पूर्ण है, यह भी पूर्ण है। पूर्ण से पूर्ण की उत्पत्ति होती है, और पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी अंत में पूर्ण ही शेष बचता है।) यही विज्ञान की थ्योरी ऑफ एवरीथिंग (Theory of Everything) है, और यही सनातन धर्म का परम सत्य है।" "तो दोस्त, आज की इस डॉक्यूमेंट्री में हमने भौतिक विज्ञान के उन 11 आयामों की यात्रा की, और देखा कि कैसे हमारा सनातन धर्म इन वैज्ञानिक सिद्धांतों से हजारों साल आगे था। हमारे ऋषि केवल संन्यासी नहीं थे, वे इस ब्रह्मांड के सबसे महान वैज्ञानिक थे, जिन्होंने अपनी चेतना के बल पर उन आयामों को छुआ, जिन्हें आज के सुपरकंप्यूटर भी नहीं समझ पा रहे हैं। अब यह फैसला तुम्हारा है कि तुम इस ब्रह्मांड को केवल तीसरे आयाम की नजर से देखना चाहते हो, या अपनी चेतना को जागृत कर उस 11वें आयाम के परम सत्य तक पहुँचना चाहते हो। तुम्हें इन 11 आयामों में से कौन सा आयाम सबसे ज्यादा रहस्यमयी लगा? मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताना, मुझे तुम्हारे विचारों का इंतजार रहेगा। अगर आज तुमने सच में कुछ नया और अद्भुत सीखा है, तो इस डॉक्यूमेंट्री को एक लाइक जरूर करना और अपने हर उस दोस्त के साथ शेयर करना जो विज्ञान और सनातन धर्म के इस महासंगम को समझना चाहता है। 'अध्यात्म गुरु की दुनिया' से जुड़े रहने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें और नोटिफिकेशन बेल को जरूर ऑन करें, ताकि हमारी अगली रहस्यमयी महा-डॉक्यूमेंट्री सबसे पहले आप तक पहुँचे। तब तक के लिए, अपना ख्याल रखना मेरे दोस्त। सत्य सनातन धर्म की जय!"
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